जीवन का सत्य

नमस्कार!  जीवन के सत्य को जानने के लिए आप सभी का स्वागत है। उम्मीद है आप सब खुश व सकुशल होंगे। आज मैं जीवन के सत्य के बारे में बात करूंगी। सबसे पहला हमारे मन में जो सवाल उठते है वो है जीवन क्या है? ब्रह्मांड ने क्यों हमे ये जीवन दिया है?? इनका उद्देश्य क्या है?? तो आइए हम इन बातों को जानते है।

             जीवन  क्या   है ??

क्या जीवन वो है जिसमे हमारे पास सब हो? क्या सबको सब कुछ मिल जाए ये आसान है? और अगर मिल गया तो क्या फिर कुछ और पाने की लालसा क्या नहीं रहेगी? वास्तविक में मानव जीवन में मिलने वाली उपलब्धियों से
संतुष्ट न रहना मूल कारण है अपने जीवन के सत्य को न पहचानने की?

लोगो के मन में हमेशा लगता है। की अगर उनके पास ये हो जाए तो वो खुश रहेंगे फिर अंत में अगर न मिले तो दुख का भाव और मिल जाए तो कुछ और पाने की लालसा बढ़ जाती है। और अंत में हम खुद को न समझकर मानव जीवन के मूल उद्देश्य को भूल जाते है और सब कुछ पाकर भी जो न मिला उसकी बेचनी से खुद को परेशान कर देते है।
क्या ये हमारी हकीकत है? नही! फिर इसका मूल कारण क्या है??  
  
          जीवन की परेशानियों के मुख्य कारण

इसके मुख्य कारण है, संतुष्ट न होना! जी हां। अगर जीवन में जितना है उतने में अगर हम संतुष्ट रहना सीख ले तो सब आसान है। जितना है उतना काफी है, ये जानते सब है पर इसको समझकर आगे बढ़ना उतना ही कठिन। 

इस दुनिया में बहुत लोग है जिनके पास बहुत कुछ होते हुए भी वो खुश नहीं और बहुत है जिनके पास बहुत कुछ न होते हुए भी वो खुश है जिसका अर्थ है संतुष्ट होना। जिससे हम अपने जीवन के मूल लक्ष्य को नहीं जान पाते, अर्थात जीवन का मूल लक्ष्य आत्म शांति है, जो बस दो चीजों से आती है।
वो दो चीज क्या है आइए उनके बारे में जाने।

                    आत्म शांति क्या है?

आत्म शांति क्या है आइए जानते है! आत्म शांति वो है जिसमे हम अपने जीवन से संतुष्ट रहते है। जहां कुछ खोने का डर नही होता। जहां बाहर कितनी भी परेशानी हो हम अंदर से मजबूत होते है। अंदर कोई हलचल नहीं होती ! जिसमे न किसी के न आने की खुशी न जाने का गम होता है। जहां हम अपने अतरात्मा को पहचान कर बस परमात्मा से प्रेम करते है। जहां सुंदर से सुंदर चीज़ हमारे अंतर मन के भाव को बदल नही पाता और हम इस संसार में रहकर भी अंदर से बस उस परमात्मा के होते है। जहां रहकर हमें परमानंद का सुख मिलता है। 
अर्थात हमारे जीवन कर मूल उद्देश्य ही परमात्मा को पाना और समझना है जो संतुष्ट के रास्ते को अपनाकर फिर आत्म शांति के बाद ईश्वर के करीब ले जाती है। 

आप सभी का धन्यवाद 
🙏🙏🙏🙏


  

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